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Wednesday, June 12, 2013

वीरता नहीं कायरता थी-------जौहर प्रथा

  अभी टीवी वाले कमरे में चाय पी रहा था. इसी वक्त घर के कुछ सदस्य 'महाराणा प्रताप' धारावाहिक देख रहे हैं. मुझे कुछ अच्छा लगा...चलो 'सास-बहु-ननद-भाभी-सौतन-नाजायज़ औलाद' ड्रामा से इतर भी कुछ आ रहा है वर्तमान में टीवी पर. मैं भी सबके साथ देखने लगा. लेकिन,...ये क्या....????
राजा (संभवत: महाराणा प्रताप का पिता) निर्णायक जंग की तैयारी में लगा हुआ है और उसकी एक रानी दूसरी रानी की चुगली कर रही है...! राजा यानी अपने पति पर ध्यान न देने का आरोप जड़ रही है...!!
दूसरा द्रश्य-------जौहर की तैयारी चल रही है.जौहर यानि स्त्रियों द्वारा जीते जी खुद को अग्नि को समर्पित कर देने वाली प्रथा.सभी बहुत ख़ुशी लग रही हैं या ऐसा दिखावा कर रही हैं जैसे पहले के लोग हनुमान चालीसा का पाठ करते हुएभूतों से नहीं डरने का किया करते थे. खैर....मान लिया सब बहुत खुश हैं दिल से...और अपनी मर्ज़ी से स्वयं को अग्नि के हवाले करना चाहती थीं...किन्तु, एक रानी जो बिग बॉस में प्रतिभागी बनकर आई थी और बस रोती और सिर्फ रोती ही रहती थी,उसे इस तथाकथित गौरवशाली,भाग्यशाली 'सुअवसर' का 'पुण्य' कमाने से ये कहकर रोका जा रहा है कि उसके गर्भ में 'पुत्र' पल रहा है...इस आधार पर उसे इस प्रथा का पलान नहीं करने दिया जाएगा.
मेरे मन में कई सारे प्रश्न उठ रहे थे इसलिए दूसरे सदस्यों को खलल डाले बिना चुपचाप उठ कर चला आया.....क्या २५-३० साल की स्त्री की खुद की जिंदगी का कोई मूल्य नहीं???
क्या एक स्त्री के जीवन का अर्थ सिर्फ और सिर्फ माँ बनने में निहित है???
अपने बच्चे को पाल-पोस कर बड़ा कर देने के बाद स्त्री के जीवन,उसकी खुशियाँ और आकांक्षाओं का कोई मोल नहीं ????
जो स्त्रियाँ इतनी वीर थीं कि अपने को धधकते-अग्निकुंड में समर्पित कर सकने में कहीं से पीछे नहीं हटती थीं....क्या वो मैदाने-जंग में तलवार लेकर अपने पति,पुत्र आदि के साथ मिलकर शत्रु से नहीं लड़ सकती थीं?????
क्या मैदान में लड़ते हुए शहीद होना सिर्फ पौरुषिक विशेषाधिकार है???
मैं....इसे न तो शहादत की संज्ञा दूंगा और न ही वीरता की.
मेरी नज़र में यह एक दुस्साहसिक ढंग से की जाने वाली सामूहिक आत्महत्या से अधिक कुछ नहीं था जिसे 'जौहर' के नाम पर व्यर्थ में ही महिमामंडित किया जाता रहा है.
भला हो...अंग्रेजों का...!!!जिन्होंने हमें 'जौहर' और 'सती' जैसी तथाकथित महान सांस्कृतिक परम्पराओं से मुक्त कराया....अंग्रेजो....मैं व्यक्तिगत रूप से आपका आभार व्यक्त करता हूँ.

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