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Saturday, June 29, 2013

कन्या भ्रूणहत्या और फेसबुक का विकृत सन्देश

आजकल फेसबुक पर एक सन्देश युवाओं और खासकर लड़कियों की 'हॉट चॉईस' बना हुआ है.इस सन्देश में कन्या भ्रूणहत्या रोकने हेतु एक अचूक युक्ति का बड़े जोर-शोर से प्रचार किया गया है, वो रामवाण उपाय है--लड़कियों का पिता की मर्ज़ी के खिलाफ जाकर विवाह करने से स्पष्ट इंकार कर देना...तभी इस देश में कन्याओं की गर्भ में की जाने वाली हत्याओं को रोका जा सकता है !!
ये अलग बात है कि कन्या भ्रूण हत्या के कारणों की जांच करने वाली किसी सरकारी संस्था अथवा प्रतिष्ठित समाजशास्त्री की बुद्धि अभी तक इस 'महान निष्कर्ष' तक नहीं पहुँच सकी जबकि फेसबुक पर सक्रिय 'विद्वानों' ने अपनी 'प्रतिभा का लोहा मनवाते' हुए इस 'लोकोपकारी' विज्ञापन को गढ़ने में रत्ती मात्र भी विलम्ब नहीं किया और 'चैतन्य' एवं 'संवेदनशील' युवा इस 'महान' सन्देश का प्रचार करने हेतु युद्ध स्तर पर जुट गयेसे प्रतीत हो रहे हैं. ऐसे में मुझे सामयिक लगा कि इस मुद्दे पर मैं भी कुछ लिखूं भले ही मेरी बातें इस विज्ञापन के समर्थकों के गले न उतरें,तब भी.  
कन्या भ्रूणहत्या का इतिहास बहुत पुराना है,राजपूताने से लेकर दक्षिण के राज्यों तक इसकी दुखद किन्तु दीर्घ परम्परा रही है. सती प्रथा,जौहर प्रथा,विधवा सामजिक बहिष्कार,पैतृक व् लौकिक अधिकारों से वंचना,समाज में दोयम दर्ज़ा,दहेज़ प्रथा,स्त्री को उपभोग की वस्तु समझना और ऊपर से 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता' का खोखला उद्घोष करना ही वाही कारन है जिसके चलते समाज में स्त्री को लेकर दोहरे मापदंडों की स्थापना हुई.
स्त्री शोषण का चक्र बहुत जटिल है,इसे समझे बिना कन्या भ्रूणहत्या के मेकेनिज्म को नहीं समझा जा सकता.
लड़कियां घर से भाग कर शादी करके बाप की नाक न कटवा दें, इसी आशंका के चलते 'कन्या भ्रूणहत्या' को अमलीजामा पहनाया जाता है, ऐसी सोच बेहद संकीर्ण,हास्यास्पद,विद्रूप,साजिशाना हरकत कही जानी चाहिए जो कन्या भ्रूणहत्या के लिए भी खुद स्त्री जाति को ही जिम्मेदार ठहराने हेतु रची गई है.
घिन आती है ऐसे थोथे व् उथले तर्क गढ़ने वालों पर..काश वो अपनी तर्कशील बुद्धि 'कन्या भ्रूणहत्या' को रोकने हेतु एक ठोस एवं कारगर रणनीति के निर्माण हेतु लगाते !!
शर्म आती है... कपड़ों और रहन-सहन से अल्ट्रा मॉडर्न दिखने वाली आधुनिकता का दंभ भरती नवयौवनाओं पर, जो इस तरह के विकृत मानसिकता युक्त संदेशों का बढ़-चढ़ कर प्रसार कर स्वयं को 'स्त्री के विरुद्ध संगठित साजिश' का अंश बना बैठती हैं.

मेरे प्रश्न हैं ------

आतंकवादी,देशद्रोही,ड्रग माफिया,तस्कर,डकैत,हत्यारा,बलात्कारी,भ्रष्टाचारी हो सकने की संभावनाओं के चलते 'बालक भ्रूणहत्या' का चलन प्रारंभ क्यों नहीं हुआ???

क्या, ऐसे पुरुषों के कारण उनके पिता/वंश/घराने के नाम पर बट्टा नहीं लगता????

 जाति,समाज,पिता की मर्ज़ी के खिलाफ जाकर शादी करना क्या दुनिया का एकमात्र सबसे बड़ा अपराध है???
   अगर हम इसे भी सत्य मानकर चलें तो एक और प्रश्न है----
 विवाह अकेली लड़की तो कर नहीं लेती...कोई न कोई पुरुष भी इस तथाकथित पाप में बराबर का भागीदार होता है, तो सजा सिर्फ लड़की जाति को क्यों?? क्यों सिर्फ कन्या भ्रूणहत्या ही ????
 अब कई लोग कहेंगे कि बेटी बाप का मान होती है,नाक होती है,इज्ज़त होती है...आदि,आदि.
ये तमाम तरह के कुतर्क दरअसल स्त्री वर्ग को गुमराह करने व् उसे सतत शोषण चक्र की बेड़ियों में जकड़े रहने देने हेतु रचे गए हैं. जो बेटी तथाकथित रूप से पराया धन होती है,गैर अमानत होती है,घर की संपत्ति से बेदखल होती है,जिसके जन्म पर घंटे-घड़ियाल नहीं बजते,जो पिता का वंश नहीं चलाती,जो पिता का दाह संस्कार तो क्या,उसके अंतिम संस्कार की प्रत्यक्ष साक्षी तक नहीं बन सकती....आखिर वो लड़की, जी हाँ, वही लड़की जब शादी विवाह जैसे नितांत व्यक्तिगत मामलों में अपनी चंद खुशियों को हासिल करने की चाह में यदि दो कदम आत्मनिर्णय के आकाश में बढ़ा उठती है तो अचानक से बाप की नाक क्यों कट जाती है ?? लाख अच्छे कर्मों के बावजूद कभी घर का चिराग न कहलवा पाने वाली लड़की आखिर कैसे घर का अँधकार बन जाती है ?
अनेकों काल्पनिक देवियों को पूजने वाले भारत देश में वास्तविक देवियों के साथ ऐसा पशुवत व्यवहार आखिर क्यों ?? इस रात की सुबह आखिर कब होगी ???????

Wednesday, June 12, 2013

वीरता नहीं कायरता थी-------जौहर प्रथा

  अभी टीवी वाले कमरे में चाय पी रहा था. इसी वक्त घर के कुछ सदस्य 'महाराणा प्रताप' धारावाहिक देख रहे हैं. मुझे कुछ अच्छा लगा...चलो 'सास-बहु-ननद-भाभी-सौतन-नाजायज़ औलाद' ड्रामा से इतर भी कुछ आ रहा है वर्तमान में टीवी पर. मैं भी सबके साथ देखने लगा. लेकिन,...ये क्या....????
राजा (संभवत: महाराणा प्रताप का पिता) निर्णायक जंग की तैयारी में लगा हुआ है और उसकी एक रानी दूसरी रानी की चुगली कर रही है...! राजा यानी अपने पति पर ध्यान न देने का आरोप जड़ रही है...!!
दूसरा द्रश्य-------जौहर की तैयारी चल रही है.जौहर यानि स्त्रियों द्वारा जीते जी खुद को अग्नि को समर्पित कर देने वाली प्रथा.सभी बहुत ख़ुशी लग रही हैं या ऐसा दिखावा कर रही हैं जैसे पहले के लोग हनुमान चालीसा का पाठ करते हुएभूतों से नहीं डरने का किया करते थे. खैर....मान लिया सब बहुत खुश हैं दिल से...और अपनी मर्ज़ी से स्वयं को अग्नि के हवाले करना चाहती थीं...किन्तु, एक रानी जो बिग बॉस में प्रतिभागी बनकर आई थी और बस रोती और सिर्फ रोती ही रहती थी,उसे इस तथाकथित गौरवशाली,भाग्यशाली 'सुअवसर' का 'पुण्य' कमाने से ये कहकर रोका जा रहा है कि उसके गर्भ में 'पुत्र' पल रहा है...इस आधार पर उसे इस प्रथा का पलान नहीं करने दिया जाएगा.
मेरे मन में कई सारे प्रश्न उठ रहे थे इसलिए दूसरे सदस्यों को खलल डाले बिना चुपचाप उठ कर चला आया.....क्या २५-३० साल की स्त्री की खुद की जिंदगी का कोई मूल्य नहीं???
क्या एक स्त्री के जीवन का अर्थ सिर्फ और सिर्फ माँ बनने में निहित है???
अपने बच्चे को पाल-पोस कर बड़ा कर देने के बाद स्त्री के जीवन,उसकी खुशियाँ और आकांक्षाओं का कोई मोल नहीं ????
जो स्त्रियाँ इतनी वीर थीं कि अपने को धधकते-अग्निकुंड में समर्पित कर सकने में कहीं से पीछे नहीं हटती थीं....क्या वो मैदाने-जंग में तलवार लेकर अपने पति,पुत्र आदि के साथ मिलकर शत्रु से नहीं लड़ सकती थीं?????
क्या मैदान में लड़ते हुए शहीद होना सिर्फ पौरुषिक विशेषाधिकार है???
मैं....इसे न तो शहादत की संज्ञा दूंगा और न ही वीरता की.
मेरी नज़र में यह एक दुस्साहसिक ढंग से की जाने वाली सामूहिक आत्महत्या से अधिक कुछ नहीं था जिसे 'जौहर' के नाम पर व्यर्थ में ही महिमामंडित किया जाता रहा है.
भला हो...अंग्रेजों का...!!!जिन्होंने हमें 'जौहर' और 'सती' जैसी तथाकथित महान सांस्कृतिक परम्पराओं से मुक्त कराया....अंग्रेजो....मैं व्यक्तिगत रूप से आपका आभार व्यक्त करता हूँ.

Saturday, June 8, 2013

मोदी पर हंगामा क्यों है बरपा??

मोदी पर हंगामा क्यों है बरपा??
क्या भाजपा वास्तव में मोदी को प्रधानमन्त्री का दावेदार घोषित नहीं करना चाहती??
क्या ये सब ड्रामा महज़ मोदी को लगातार राष्ट्रीय सुर्ख़ियों में बनाए रखने हेतु किया जा रहा सोचा समझा प्रपंच मात्र है???
क्या मोदी भाजपा की डूबती नैया के इकलौते काबिल साहिल हैं??
क्या राष्ट्र के रूप में भारत की समस्त समस्याओं का रामवाण सिर्फ और सिर्फ मोदी हैं???
क्या एक मोदी इतने बड़े देश को खा जायेंगे ???

मोदी को ये देश चुने या न चुने लेकिन उन्हें अस्वस्थ व् अलोकतान्त्रिक ढ़ंग से दौड़ में भाग लेने से प्रतिबंधित कर देना क्या न्यायपूर्ण है?? क्या ऐसा किया जाना हमारे संविधान की आत्मा के अनुकूल है??एक लोकतंत्र आधारित चुनावी व्यवस्था में देश के भविष्य का फैसला लेने का हक़ सिर्फ और सिर्फ वहां के आम नागरिकों का बनता है न कि कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी ठेकेदारों का.

मैं मोदी का समर्थक बिलकुल नहीं हूँ.....लेकिन,मोदी को हौव्वा बना कर रख देने तथा दूसरों को भी ऐसा मानने हेतु पूर्वपीठिका तैयार करने वालों के साथ भी कतई नहीं हूँ.
भारत की जनता भोली हो सकती है,भावुक हो सकती है,नासमझ भी हो सकती है,लेकिन.... एक राष्ट्र के रूप में भारत एक बहुत ही समझदार लोकतान्त्रिक इतिहास की विरासत समेटे हुए है. अगर कोई मोदी इसके धर्मनिरपेक्ष स्वरुप व् सामजिक समरसतापूर्ण ताने-बाने केसाथ छेड़-छाड़ करने की हिमाकत भी करेगा तो उसके कान खींचने हेतु सर्वोच्च न्यायालय, संसद, मीडिया और हम यानि भारतीय नागरिक हैं न !!!
जब हमारी कोई दुधारू गाय या भैंस 'मरखा' यानि हमलावर हो जाती है तो कैसे सजगता और सूझ-बूझ के साथ उसका दूध निकाला जाता है.
यकीन जानिये-----न तो नरेंद्र मोदी वर्तमान समस्याओं को हल करने हेतु 'अलादीन का चिराग' साबित होंगे और न ही भारतीय लोकतंत्र हेतु 'फ्रेंकिसटीन का दानव'.
हाँ,वो एक कुशल प्रशासक के गुण रखते हैं,उनके अन्दर विद्द्यमान संभावनाओं के सजग संदोहन हेतु कारगर रणनीति बनाया जाना अधिक बेहतर व् सकारात्मक विकल्प होगा.

Sunday, May 10, 2009

Maa Tujhe SALAAAA...................AAM

There is no alternative to mother.Neither father Nor the GOD. No Not at all.

Monday, May 4, 2009

Waistage Of Food Is A Sin

This is seen oftenly now a days that a great quantity

of food and flowers is waisted in socialy organized

festivals as Marriage,Birthday anevarssary etc.

The waistage of food is a very serious problem

because our country and rest of the world is facing the

tragic problem of starvation.It is seen specialy in 3rd

world countries that people have nothing but hunger.

In India the condition is not so contrary.In Bihar

and Calahandi a region of Orissa, it can be seen easialy

that hunger is a silent killer.

So We should refrain from show-off.We should save

food for nation.We must save humanity.This is our
primary Duty.